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कथं परानुभावज्ञ: स्वं प्रशंसितुमर्हति।
परेण समवेतस्तु य: प्रशस्य: स पूज्यते॥ ३॥
अनुवाद
जो दूसरों के प्रभाव को जानता है, वह अपनी प्रशंसा कैसे कर सकता है? जो दूसरों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए भी प्रशंसनीय बना रहता है, वह सर्वत्र पूजित होता है ॥3॥
How can one who knows the influence of others praise himself? He who remains praiseworthy even when in competition with others is worshipped everywhere. ॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥