Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.15.19: रत्नों के स्वामी राजा जरासंध की पूजा करते हैं (उसे धन देकर), परंतु वह उससे भी संतुष्ट नहीं होता। अपनी बुद्धि के अभाव के कारण वह अन्याय का सहारा लेकर उन पर अत्याचार करता है॥19॥ | mahabharat अध्याय 2.15: जरासंधके विषयमें राजा युधिष्ठिर, भीम और श्रीकृष्णकी बातचीत । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रत्नभाजो हि राजानो जरासंधमुपासते।
न च तुष्यति तेनापि बाल्यादनयमास्थित:॥ १९॥
अनुवाद
रत्नों के स्वामी राजा जरासंध की पूजा करते हैं (उसे धन देकर), परंतु वह उससे भी संतुष्ट नहीं होता। अपनी बुद्धि के अभाव के कारण वह अन्याय का सहारा लेकर उन पर अत्याचार करता है॥19॥
Kings who are the masters of precious stones worship Jarasandha (by giving him money), but he is not satisfied even with that. Due to his lack of wisdom, he takes recourse to injustice and oppresses them.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥