श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति  »  श्लोक d3-d5h
 
 
श्लोक  2.14.d3-d5h 
(दुर्योधनं शान्तनवं द्रोणं द्रौणायनिं कृपम्।
कर्णं च शिशुपालं च रुक्मिणं च धनुर्धरम्॥
एकलव्यं द्रुमं श्वेतं शैब्यं शकुनिमेव च।
एतानजित्वा संग्रामे कथं शक्नोषि तं क्रतुम्॥
अथैते गौरवेणैव न योत्स्यन्ति नराधिपा:।)
 
 
अनुवाद
दुर्योधन, भीष्म, द्रोण, अश्वत्थामा, कृपाचार्य, कर्ण, शिशुपाल, रुक्मी, धनुर्धर एकलव्य, द्रुम, श्वेत, शैब्य और शकुनि - इन सभी वीरों को युद्ध में परास्त किये बिना आप उस यज्ञ को कैसे संपन्न कर सकते हैं? परन्तु ये मनुष्य तुम्हारा अभिमान समझकर युद्ध न करेंगे।
 
Duryodhana, Bhishma, Drona, Ashwatthama, Kripacharya, Karna, Shishupala, Rukmi, archer Ekalavya, Drum, Shweta, Shaibya and Shakuni - how can you perform that yagya without defeating all these heroes in the battle? But these men will not fight considering your pride.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)