(दुर्योधनं शान्तनवं द्रोणं द्रौणायनिं कृपम्।
कर्णं च शिशुपालं च रुक्मिणं च धनुर्धरम्॥
एकलव्यं द्रुमं श्वेतं शैब्यं शकुनिमेव च।
एतानजित्वा संग्रामे कथं शक्नोषि तं क्रतुम्॥
अथैते गौरवेणैव न योत्स्यन्ति नराधिपा:।)
अनुवाद
दुर्योधन, भीष्म, द्रोण, अश्वत्थामा, कृपाचार्य, कर्ण, शिशुपाल, रुक्मी, धनुर्धर एकलव्य, द्रुम, श्वेत, शैब्य और शकुनि - इन सभी वीरों को युद्ध में परास्त किये बिना आप उस यज्ञ को कैसे संपन्न कर सकते हैं? परन्तु ये मनुष्य तुम्हारा अभिमान समझकर युद्ध न करेंगे।
Duryodhana, Bhishma, Drona, Ashwatthama, Kripacharya, Karna, Shishupala, Rukmi, archer Ekalavya, Drum, Shweta, Shaibya and Shakuni - how can you perform that yagya without defeating all these heroes in the battle? But these men will not fight considering your pride.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥