इत्येषा मे मती राजन् यथा वा मन्यसेऽनघ।
एवंगते ममाचक्ष्व स्वयं निश्चित्य हेतुभि:॥ ७०॥
अनुवाद
हे निष्पाप राजा! यह मेरी राय है, फिर जैसा उचित समझो वैसा करो। ऐसी स्थिति में, आप स्वयं ही कुछ निर्णय करके तर्क सहित मुझे बताओ। 70.
O innocent king! This is my opinion, then do as you deem fit. In such a situation, decide something for yourself and with some logic and then tell me. 70.
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि राजसूयारम्भपर्वणि कृष्णवाक्ये चतुर्दशोऽध्याय:॥ १४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत राजसूयारम्भपर्वमें श्रीकृष्णवाक्य-विषयक चौदहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ५ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ७५ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)