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श्री महाभारत
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पर्व 2: सभा पर्व
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अध्याय 14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति
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श्लोक 69
श्लोक
2.14.69
समारम्भो न शक्योऽयमन्यथा कुरुनन्दन।
राजसूयश्च कात्स्न्र्येन कर्तुं मतिमतां वर॥ ६९॥
अनुवाद
हे बुद्धिमानों में श्रेष्ठ कुरुनन्दन! ऐसा किए बिना राजसूय यज्ञ का आयोजन पूर्णतः सफल नहीं होगा ॥69॥
Kurunandana, the best among the wise! Without doing this, the organization of Rajsuya Yagya will not be completely successful. 69॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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