श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  2.14.63 
तेन रुद्धा हि राजान: सर्वे जित्वा गिरिव्रजे।
कन्दरे पर्वतेन्द्रस्य सिंहेनेव महाद्विपा:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
उसने समस्त राजाओं को जीतकर उन्हें गिरिव्रज में बन्द कर दिया है, जैसे सिंह ने बड़े-बड़े हाथियों को किसी विशाल पर्वत की गुफा में बन्द कर दिया हो।
 
Having conquered all the kings, he has imprisoned them in Girivraja, as if a lion has confined large elephants in a cave on a great mountain. 63.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)