Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.14.6-7h: महाराज! आजकल गुणों की दृष्टि से भोजवंशियों का विस्तार राजा ययाति के कुल में सबसे अधिक हुआ है। भोजवंशी चारों दिशाओं में फैल गए हैं और आज के सभी क्षत्रिय उन्हीं के धन-सम्पत्ति का आश्रय ले रहे हैं। | mahabharat अध्याय 2.14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ययातेस्त्वेव भोजानां विस्तरो गुणतो महान्।
भजतेऽद्य महाराज विस्तरं स चतुर्दिशम्॥ ६॥
तेषां तथैव तां लक्ष्मीं सर्वक्षत्रमुपासते।
अनुवाद
महाराज! आजकल गुणों की दृष्टि से भोजवंशियों का विस्तार राजा ययाति के कुल में सबसे अधिक हुआ है। भोजवंशी चारों दिशाओं में फैल गए हैं और आज के सभी क्षत्रिय उन्हीं के धन-सम्पत्ति का आश्रय ले रहे हैं।
Maharaj! Nowadays, in terms of qualities, the Bhojvanshis have expanded the most in the clan of King Yayati. The Bhojvanshis have grown and spread in all the four directions and all the Kshatriyas of today are taking shelter of their wealth and property. 6 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥