श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.14.56 
अष्टादश सहस्राणि भ्रातॄणां सन्ति न: कुले।
आहुकस्य शतं पुत्रा एकैकस्त्रिदशावर:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
हमारे कुल में अठारह हजार भाई हैं। आहुका के सौ पुत्र हैं, जिनमें से प्रत्येक देवताओं के समान पराक्रमी है।
 
There are eighteen thousand brothers in our clan. Aahuka has a hundred sons, each one of whom is as powerful as the gods. 56.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)