श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.14.5 
ऐलवंश्याश्च ये राजंस्तथैवेक्ष्वाकवो नृपा:।
तानि चैकशतं विद्धि कुलानि भरतर्षभ॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ राजा! पुरुरवा और इक्ष्वाकु वंश के जो राजा आज जीवित हैं, उनके सौ कुल हैं; यह बात आपको अच्छी तरह जाननी चाहिए॥5॥
 
O best king of the Bharatas! The kings of the lineage of Pururava and Ikshvaku who are alive today have one hundred clans; you should know this well. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)