श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.14.43 
तथा तु डिम्भकं श्रुत्वा हंस: परपुरंजय:।
प्रपेदे यमुनामेव सोऽपि तस्यां न्यमज्जत॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार लार्वा के मर जाने की बात सुनकर शत्रु नगर को जीतने वाला वह हंस भी अपने भाई के शोक से यमुना में कूद पड़ा और डूबकर मर गया ॥43॥
 
On hearing that the larva had died in this manner, the swan who had conquered the enemy city also jumped into the Yamuna out of grief for his brother and died by drowning. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)