vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति
»
श्लोक 4
श्लोक
2.14.4
ऐलस्येक्ष्वाकुवंशस्य प्रकृतिं परिचक्षते।
राजान: श्रेणिबद्धाश्च तथान्ये क्षत्रिया भुवि॥ ४॥
अनुवाद
इस समय संसार के सभी श्रेणीबद्ध राजा और अन्य क्षत्रिय भी अपने को सम्राट पुरुरवा और इक्ष्वाकु की संतान कहते हैं॥4॥
At this time, all the ranked kings and other Kshatriyas of the world also call themselves the children of Emperor Pururava and Ikshvaku. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×