श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.14.4 
ऐलस्येक्ष्वाकुवंशस्य प्रकृतिं परिचक्षते।
राजान: श्रेणिबद्धाश्च तथान्ये क्षत्रिया भुवि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
इस समय संसार के सभी श्रेणीबद्ध राजा और अन्य क्षत्रिय भी अपने को सम्राट पुरुरवा और इक्ष्वाकु की संतान कहते हैं॥4॥
 
At this time, all the ranked kings and other Kshatriyas of the world also call themselves the children of Emperor Pururava and Ikshvaku. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)