श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  2.14.38 
तावुभौ सहितौ वीरौ जरासंधश्च वीर्यवान्।
त्रयस्त्रयाणां लोकानां पर्याप्ता इति मे मति:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
भ्राता युधिष्ठिर, मेरा मानना ​​है कि वे दो वीर हंस और साथ रहने वाले लार्वा तथा वीर जरासंध - तीनों मिलकर तीनों लोकों का सामना करने के लिए पर्याप्त थे।
 
Brother Yudhishthira, I believe that those two brave swans and the larvae living together as well as the valiant Jarasandha - all three together were sufficient to face the three worlds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)