श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.14.36 
अनारभन्तो निघ्नन्तो महास्त्रै: शत्रुघातिभि:।
न हन्यामो वयं तस्य त्रिभिर्वर्षशतैर्बलम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
'यदि हम अपने विशाल हथियारों से शत्रु पर आक्रमण करते रहें, तो भी हम तीन सौ वर्षों में भी उसकी सेना को नष्ट नहीं कर सकते।' 36.
 
'Even if we keep attacking the enemy with our huge weapons, we cannot destroy his army even in three hundred years.' 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)