श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति  »  श्लोक 26-28
 
 
श्लोक  2.14.26-28 
शूरसेना भद्रकारा बोधा: शाल्वा: पटच्चरा:।
सुस्थलाश्च सुकुट्टाश्च कुलिन्दा: कुन्तिभि: सह॥ २६॥
शाल्वायनाश्च राजान: सोदर्यानुचरै: सह।
दक्षिणा ये च पञ्चाला: पूर्वा: कुन्तिषु कोशला:॥ २७॥
तथोत्तरां दिशं चापि परित्यज्य भयार्दिता:।
मत्स्या: संन्यस्तपादाश्च दक्षिणां दिशमाश्रिता:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
शूरसेन, भद्रकर, बोध, शाल्व, पटच्चर, सुस्थल, सुकुत्त, कुलिन्द, कुन्ति और शाल्वयन आदि राजा भी अपने भाइयों और सेवकों सहित दक्षिण दिशा में भाग गए हैं। दक्षिण पांचाल और पूर्व कुन्ति प्रदेश में रहने वाले समस्त क्षत्रिय तथा कोशल, मत्स्य, संयस्तपाद आदि राजपूत जरासंध के भय से पीड़ित होकर उत्तर दिशा छोड़कर दक्षिण दिशा में शरण ले चुके हैं॥26-28॥
 
Kings like Shurasena, Bhadrakar, Bodh, Shalva, Patacchar, Susthal, Sukutta, Kulinda, Kunti and Shalvayana have also fled to the south along with their brothers and servants. All the Kshatriyas who used to live in the southern Panchal and eastern Kunti region and the Rajputs like Kosala, Matsya, Sanyastapada etc., suffering from the fear of Jarasandha, have left the north and taken refuge in the south.॥26-28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)