श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.14.24 
न कुलं स बलं राजन्नभ्यजानात् तथाऽऽत्मन:।
पश्यमानो यशो दीप्तं जरासंधमुपस्थित:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! इन्हें अपने बल और वंश की भी चिंता नहीं है; केवल जरासंध के उज्ज्वल यश को देखकर ये उसी पर आश्रित हो गये हैं।
 
O King! They do not even care about their own strength and lineage; looking only at the bright fame of Jarasandha, they have become dependent on him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)