Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.14.23: हम सदैव उनसे प्रेम करते हैं, उनके प्रति नम्रता रखते हैं और उनके स्वजन हैं; फिर भी वे हमारे समान अपने भक्तों को स्वीकार नहीं करते, बल्कि हमारे शत्रुओं के साथ संगति करते हैं ॥23॥ | mahabharat अध्याय 2.14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रियाण्याचरत: प्रह्वान् सदा सम्बन्धिनस्तत:।
भजतो न भजत्यस्मानप्रियेषु व्यवस्थित:॥ २३॥
अनुवाद
हम सदैव उनसे प्रेम करते हैं, उनके प्रति नम्रता रखते हैं और उनके स्वजन हैं; फिर भी वे हमारे समान अपने भक्तों को स्वीकार नहीं करते, बल्कि हमारे शत्रुओं के साथ संगति करते हैं ॥23॥
We always love Him, show humility towards Him and are His relatives; yet He does not accept His devotees like us and instead associates with our enemies. ॥23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥