vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 14: श्रीकृष्णकी राजसूययज्ञके लिये सम्मति
»
श्लोक 11-12h
श्लोक
2.14.11-12h
तमेव च महाराज शिष्यवत् समुपस्थित:॥ ११॥
वक्र: करूषाधिपतिर्मायायोधी महाबल:।
अनुवाद
युधिष्ठिर! माया से लड़ने वाले महाबली करुषराज दन्तवक्र भी जरासंध के सामने शिष्य की भाँति हाथ जोड़कर खड़े हैं। 11 1/2
Yudhishthira! Even the mighty Karusharaj Dantavakra, who fights with illusion, stands before Jarasandha with folded hands like a disciple. 11 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×