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mahabharat 2.13.7: युधिष्ठिर समस्त धर्मात्माओं में श्रेष्ठ थे। उन्होंने सब लोगों पर दया की और सबका समान रूप से कल्याण करने लगे। 7॥   |   mahabharat अध्याय 2.13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.13.7 
अनुगृह्णन् प्रजा: सर्वा: सर्वधर्मभृतां वर:।
अविशेषेण सर्वेषां हितं चक्रे युधिष्ठिर:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर समस्त धर्मात्माओं में श्रेष्ठ थे। उन्होंने सब लोगों पर दया की और सबका समान रूप से कल्याण करने लगे। 7॥
 
Yudhishthir was the best among all the religious souls. He showed kindness to all the people and started providing welfare to everyone equally. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)