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mahabharat 2.13.50: कुछ लोग जो अपने लिए हितकर है, उसे ही मेरे लिए भी हितकर समझते हैं। इस प्रकार प्रायः अपने-अपने प्रयोजनों के लिए लोगों में भिन्न-भिन्न मत देखे जाते हैं ॥50॥   |   mahabharat अध्याय 2.13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  2.13.50 
प्रियमेव परीप्सन्ते केचिदात्मनि यद्धितम्।
एवम्प्रायाश्च दृश्यन्ते जनवादा: प्रयोजने॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग जो अपने लिए हितकर है, उसे ही मेरे लिए भी हितकर समझते हैं। इस प्रकार प्रायः अपने-अपने प्रयोजनों के लिए लोगों में भिन्न-भिन्न मत देखे जाते हैं ॥50॥
 
Some people consider that which is beneficial for them to be good and beneficial for me also. In this way, different opinions are often seen from people for their own purposes. ॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)