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mahabharat 2.13.49: कुछ लोग मुझ पर प्रेम के कारण मेरे दोष और भूलों की ओर संकेत नहीं करते, परन्तु कुछ लोग स्वार्थवश केवल वही बातें कहते हैं जिनसे मुझे प्रसन्नता होती है॥ 49॥   |   mahabharat अध्याय 2.13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  2.13.49 
केचिद्धि सौहृदादेव न दोषं परिचक्षते।
स्वार्थहेतोस्तथैवान्ये प्रियमेव वदन्त्युत॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग मुझ पर प्रेम के कारण मेरे दोष और भूलों की ओर संकेत नहीं करते, परन्तु कुछ लोग स्वार्थवश केवल वही बातें कहते हैं जिनसे मुझे प्रसन्नता होती है॥ 49॥
 
Some people do not point out my faults and mistakes because of their love for me. Others say only those things out of selfishness that please me.॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)