Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.13.48: मेरे सभी मित्र मिलकर मुझसे वही राजसूय यज्ञ करने को कहते हैं; परंतु इस विषय में अंतिम निर्णय आपकी सलाह से ही होगा ॥48॥ | mahabharat अध्याय 2.13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तं राजसूयं सुहृद: कार्यमाहु: समेत्य मे।
तत्र मे निश्चिततमं तव कृष्ण गिरा भवेत्॥ ४८॥
अनुवाद
मेरे सभी मित्र मिलकर मुझसे वही राजसूय यज्ञ करने को कहते हैं; परंतु इस विषय में अंतिम निर्णय आपकी सलाह से ही होगा ॥48॥
All my friends come together and ask me to perform the same Rajasuya Yagya; But the final decision regarding this will be taken only by your advice. 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥