श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.13.46 
युधिष्ठिर उवाच
प्रार्थितो राजसूयो मे न चासौ केवलेप्सया।
प्राप्यते येन तत् ते हि विदितं कृष्ण सर्वश:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "श्रीकृष्ण! मैं राजसूय यज्ञ करना चाहता हूँ; किन्तु केवल इच्छा करने से वह सम्पन्न नहीं हो सकता। उस यज्ञ को सम्पन्न करने का उपाय केवल आप ही जानते हैं।" 46.
 
Yudhishthira said, "Shri Krishna! I want to perform the Rajasuya Yagya; but it cannot be accomplished merely by wishing for it. The means by which that Yagya can be accomplished are known only to you." 46.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)