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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  2.13.45 
तं विश्रान्तं शुभे देशे क्षणिनं कल्पमच्युतम्।
धर्मराज: समागम्याज्ञापयत् स्वप्रयोजनम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद उन्होंने एक सुन्दर भवन में विश्राम किया। कुछ समय बाद जब उनकी उनसे भेंट हो सकी और उन्हें इसके लिए अवसर मिला, तब धर्मराज युधिष्ठिर ने आकर उनसे अपना सारा प्रयोजन बताया।
 
After this he rested in a wonderful house. After some time when he was able to meet him and he found an opportunity for this, then Dharmaraja Yudhishthira came and told him his entire purpose.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)