श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  2.13.42 
व्यतीत्य विविधान् देशांस्त्वरावान् क्षिप्रवाहन:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
मार्ग में अनेक देशों को पार करते हुए वे बड़ी वेग से आगे बढ़ रहे थे। उनके रथ के घोड़े बड़े वेगवान थे ॥42॥
 
Crossing many countries on the way, they were moving ahead with great haste. The horses of their chariot were very fast. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)