श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.13.29 
स भ्रातृभि: पुनर्धीमानृत्विग्भिश्च महात्मभि:।
मन्त्रिभिश्चापि सहितो धर्मराजो युधिष्ठिर:।
धौम्यद्वैपायनाद्यैश्च मन्त्रयामास मन्त्रवित्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तब मन्त्रणा के महत्त्व को जानने वाले बुद्धिमान धर्मराज युधिष्ठिर अपने भाइयों, महात्मा ऋत्विज, मन्त्रियों तथा धौम्य और व्यास आदि महर्षियों के साथ इस विषय पर पुनः विचार करने लगे॥29॥
 
Then the wise Dharmaraja Yudhishthir, who knew the importance of Mantrana, started thinking again on this matter along with his brothers, Mahatma Ritvija, ministers and Maharishis like Dhaumya and Vyas. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)