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mahabharat 2.13.27: प्रजानाथ! उनके वीरतापूर्ण, मधुर और उत्तम वचन सुनकर शत्रुघ्न और पाण्डवपुत्र युधिष्ठिर ने उन्हें हृदय में ग्रहण कर लिया॥27॥   |   mahabharat अध्याय 2.13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.13.27 
स धर्म्यं पाण्डवस्तेषां वच: श्रुत्वा विशाम्पते।
धृष्टमिष्टं वरिष्ठं च जग्राह मनसारिहा॥ २७॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! उनके वीरतापूर्ण, मधुर और उत्तम वचन सुनकर शत्रुघ्न और पाण्डवपुत्र युधिष्ठिर ने उन्हें हृदय में ग्रहण कर लिया॥27॥
 
Prajanath! On hearing his brave, sweet and excellent words, Yudhishthira, the son of Shatrughan and Pandava, accepted them in his heart. ॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)