श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.13.25 
समर्थोऽसि महाबाहो सर्वे ते वशगा वयम्।
अचिरात् त्वं महाराज राजसूयमवाप्स्यसि॥ २५॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! आप उस यज्ञ को करने में समर्थ हैं। हम सब आपकी आज्ञा में हैं। महाराज! आप शीघ्र ही राजसूय यज्ञ को पूर्ण कर सकेंगे।॥ 25॥
 
‘Mahabaho! You are capable of performing that yajna. We all are under your command. Maharaj! You will be able to complete the Rajasuya yajna very soon.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)