श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.13.24 
दर्वीहोमानुपादाय सर्वान् य: प्राप्नुते क्रतून्।
अभिषेकं च यस्यान्ते सर्वजित् तेन चोच्यते॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'उस यज्ञ का अनुष्ठान करने वाला 'दर्विहोम' (अग्निहोत्र आदि) से लेकर समस्त यज्ञों का फल प्राप्त करता है और यज्ञ के अन्त में जो अभिषेक होता है, उसके कारण यज्ञ करने वाला राजा 'सर्वजित सम्राट' के नाम से विख्यात होता है ॥24॥
 
'The one who performs the rituals of that yagya, gets the fruits of all the yagyas starting from 'Darvihom' (Agnihotra etc.) and due to the consecration that takes place at the end of the yagya, the king performing the yagya becomes known as 'Sarvjit Samrat'. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)