श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.13.21 
येनाभिषिक्तो नृपतिर्वारुणं गुणमृच्छति।
तेन राजापि तं कृत्स्नं सम्राड्गुणमभीप्सति॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'महाराज! राजसूय यज्ञ से अभिषिक्त होने पर राजा वरुण के गुणों को प्राप्त करता है; इसीलिए प्रत्येक राजा उस यज्ञ के द्वारा सम्राट के सभी गुणों को प्राप्त करने की आकांक्षा रखता है। 21॥
 
'Maharaj! When anointed by the Rajasuya Yajna, the king acquires the qualities of Varuna; That is why every king aspires to attain all the qualities of an emperor through that yagya. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)