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mahabharat 2.13.19: वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! उस समय वक्ताओं में श्रेष्ठ राजा युधिष्ठिर ने अपने मन्त्रियों और भाइयों को बुलाकर उनसे बार-बार पूछा कि 'राजसूय यज्ञ के विषय में आपकी क्या राय है?'॥19॥   |   mahabharat अध्याय 2.13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 13: युधिष्ठिरका राजसूयविषयक संकल्प और उसके विषयमें भाइयों, मन्त्रियों, मुनियों तथा श्रीकृष्णसे सलाह लेना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.13.19 
वैशम्पायन उवाच
स मन्त्रिण: समानाय्य भ्रातॄंश्च वदतां वर:।
राजसूयं प्रति तदा पुन: पुनरपृच्छत॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! उस समय वक्ताओं में श्रेष्ठ राजा युधिष्ठिर ने अपने मन्त्रियों और भाइयों को बुलाकर उनसे बार-बार पूछा कि 'राजसूय यज्ञ के विषय में आपकी क्या राय है?'॥19॥
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! At that time King Yudhishthira, the best of speakers, called his ministers and brothers and asked them repeatedly, 'What is your opinion regarding the Rajasuya Yagna?'॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)