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mahabharat 2.12.7: हे महर्षे, जो नियमित व्रत का पालन करते हैं, उन्होंने ऐसा कौन-सा कर्म या तप किया है, जिसके कारण वे इतने प्रसिद्ध हो गए हैं और देवराज इन्द्र से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं॥7॥   |   mahabharat अध्याय 2.12: राजा हरिश्चन्द्रका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके प्रति राजा पाण्डुका संदेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 12: राजा हरिश्चन्द्रका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके प्रति राजा पाण्डुका संदेश  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.12.7 
किं कर्म तेनाचरितं तपो वा नियतव्रत।
येनासौ सह शक्रेण स्पर्द्धते सुमहायशा:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे महर्षे, जो नियमित व्रत का पालन करते हैं, उन्होंने ऐसा कौन-सा कर्म या तप किया है, जिसके कारण वे इतने प्रसिद्ध हो गए हैं और देवराज इन्द्र से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं॥7॥
 
Maharshe who observes the fast regularly! What action or penance has he performed due to which he has become very famous and is competing with Devraj Indra. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)