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mahabharat 2.12.5: परंतु हे ऋषिवर! आपने इन्द्र की सभा में अधिकांश देवताओं की उपस्थिति का वर्णन किया है तथा कुछ गन्धर्वों और महर्षियों की स्थिति का भी उल्लेख किया है।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 2.12: राजा हरिश्चन्द्रका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके प्रति राजा पाण्डुका संदेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 12: राजा हरिश्चन्द्रका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके प्रति राजा पाण्डुका संदेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.12.5 
शक्रस्य तु सभायां तु देवा: संकीर्तिता मुने।
उद्देशतश्च गन्धर्वा विविधाश्च महर्षय:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
परंतु हे ऋषिवर! आपने इन्द्र की सभा में अधिकांश देवताओं की उपस्थिति का वर्णन किया है तथा कुछ गन्धर्वों और महर्षियों की स्थिति का भी उल्लेख किया है।॥5॥
 
But, sage! You have described the presence of most of the gods in Indra's court and have also mentioned the position of a few Gandharvas and Maharishis. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)