Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.12.32: तुम संसार में उन्नति करो, सुखी रहो और ब्राह्मणों को धन से संतुष्ट करो। तुमने मुझसे जो कुछ पूछा था, वह मैंने तुम्हें विस्तारपूर्वक बता दिया है। अब मैं यहाँ से द्वारका जाऊँगा, जिसके लिए मैं तुम्हारी अनुमति चाहता हूँ ॥ 32॥ | mahabharat अध्याय 2.12: राजा हरिश्चन्द्रका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके प्रति राजा पाण्डुका संदेश । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भव एधस्व मोदस्व धनैस्तर्पय च द्विजान्।
एतत् ते विस्तरेणोक्तं यन्मां त्वं परिपृच्छसि।
आपृच्छे त्वां गमिष्यामि दाशार्हनगरीं प्रति॥ ३२॥
अनुवाद
तुम संसार में उन्नति करो, सुखी रहो और ब्राह्मणों को धन से संतुष्ट करो। तुमने मुझसे जो कुछ पूछा था, वह मैंने तुम्हें विस्तारपूर्वक बता दिया है। अब मैं यहाँ से द्वारका जाऊँगा, जिसके लिए मैं तुम्हारी अनुमति चाहता हूँ ॥ 32॥
May you prosper in the world, may you be happy and may you satisfy the brahmins with wealth. I have told you in detail whatever you asked me. Now I will go from here to Dwarka, for which I seek your permission. ॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥