Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.12.30: और जब इसका अनुष्ठान किया जाता है, तब वह कारण बनता है जिसके कारण पृथ्वी पर विनाशकारी युद्ध होता है, जिसके परिणामस्वरूप क्षत्रियों का संहार और संसार का विनाश होता है ॥30॥ | mahabharat अध्याय 2.12: राजा हरिश्चन्द्रका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके प्रति राजा पाण्डुका संदेश । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युद्धं च क्षत्रशमनं पृथिवीक्षयकारणम्।
किंचिदेव निमित्तं च भवत्यत्र क्षयावहम्॥ ३०॥
अनुवाद
और जब इसका अनुष्ठान किया जाता है, तब वह कारण बनता है जिसके कारण पृथ्वी पर विनाशकारी युद्ध होता है, जिसके परिणामस्वरूप क्षत्रियों का संहार और संसार का विनाश होता है ॥30॥
And when it is performed, one becomes the cause due to which a destructive war occurs on the earth, which results in the massacre of Kshatriyas and destruction of the world. ॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥