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श्री महाभारत
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पर्व 2: सभा पर्व
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अध्याय 11: ब्रह्माजीकी सभाका वर्णन
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श्लोक 54
श्लोक
2.11.54
अष्टाशीतिसहस्राणि ऋषीणामूर्ध्वरेतसाम्।
प्रजावतां च पञ्चाशदृषीणामपि पाण्डव॥ ५४॥
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! उस सभा में अट्ठासी हजार ऊर्ध्वरेता ऋषिगण और पचास पुत्रवान महर्षि उपस्थित हैं ॥54॥
Pandunandan! Eighty-eight thousand Urdhvareta sages and fifty Maharishis having children are present in that meeting. 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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