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mahabharat 2.11.53: हे मनुष्यों के स्वामी! संक्षेप में यह समझ लो कि तीनों लोकों में जो कुछ भी स्थावर-जंगम तत्त्वों के रूप में दिखाई देता है, वह सब मैंने उस सभा में देखा ॥ 53॥   |   mahabharat अध्याय 2.11: ब्रह्माजीकी सभाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 11: ब्रह्माजीकी सभाका वर्णन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  2.11.53 
यच्च किंचित् त्रिलोकेऽस्मिन् दृश्यते स्थाणु जङ्गमम्।
सर्वं तस्यां मया दृष्टमिति विद्धि नराधिप॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! संक्षेप में यह समझ लो कि तीनों लोकों में जो कुछ भी स्थावर-जंगम तत्त्वों के रूप में दिखाई देता है, वह सब मैंने उस सभा में देखा ॥ 53॥
 
O Lord of men! In short, understand that whatever is visible in the form of mobile and immobile elements in the three worlds, I saw it all in that assembly. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)