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mahabharat 2.11.52-53h: राजेन्द्र! स्वामी कार्तिकेय भी वहाँ विराजमान रहते हैं और सदैव भगवान ब्रह्मा की सेवा करते हैं। भगवान नारायण, देवर्षि, बालखिल्य ऋषि तथा अन्य योनिज और अयोनिज ऋषि उस सभा में भगवान ब्रह्मा की आराधना करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 2.11: ब्रह्माजीकी सभाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 11: ब्रह्माजीकी सभाका वर्णन  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  2.11.52-53h 
महासेनश्च राजेन्द्र सदोपास्ते पितामहम्।
देवो नारायणस्तस्यां तथा देवर्षयश्च ये॥ ५२॥
ऋषयो बालखिल्याश्च योनिजायोनिजास्तथा।
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! स्वामी कार्तिकेय भी वहाँ विराजमान रहते हैं और सदैव भगवान ब्रह्मा की सेवा करते हैं। भगवान नारायण, देवर्षि, बालखिल्य ऋषि तथा अन्य योनिज और अयोनिज ऋषि उस सभा में भगवान ब्रह्मा की आराधना करते हैं।
 
Rajendra! Swami Kartikeya is also present there and always serves Lord Brahma. Lord Narayana, Devarshis, Balkhilya Rishis and other yonija and ayonija Rishis worship Lord Brahma in that assembly. 52 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)