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mahabharat 2.11.15-16: वह सभा, अग्नि, चन्द्रमा और सूर्य से भी अधिक प्रकाशमान, अनन्त प्रभाव वाली नाना प्रकार की प्रकाशमान दिव्य वस्तुओं से प्रकाशित होकर, स्वर्ग से भी ऊपर स्थित प्रतीत होती है, मानो वह अपनी प्रभा से सूर्यमण्डल को भी प्रकाशित कर रही हो ॥15-16॥   |   mahabharat अध्याय 2.11: ब्रह्माजीकी सभाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 11: ब्रह्माजीकी सभाका वर्णन  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  2.11.15-16 
दिव्यैर्नानाविधैर्भावैर्भासद्भिरमितप्रभै:॥ १५॥
अति चन्द्रं च सूर्यं च शिखिनं च स्वयम्प्रभा।
दीप्यते नाकपृष्ठस्था भर्त्सयन्तीव भास्करम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वह सभा, अग्नि, चन्द्रमा और सूर्य से भी अधिक प्रकाशमान, अनन्त प्रभाव वाली नाना प्रकार की प्रकाशमान दिव्य वस्तुओं से प्रकाशित होकर, स्वर्ग से भी ऊपर स्थित प्रतीत होती है, मानो वह अपनी प्रभा से सूर्यमण्डल को भी प्रकाशित कर रही हो ॥15-16॥
 
That assembly, illuminated by various kinds of luminous divine objects having infinite effects, which are more luminous than the fire, the moon, and the sun, seems to be situated above the heaven, as if it is outshining the solar system with its brilliance. ॥15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)