Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.11.13: राजन! वह सदैव परम सुख देने वाला है। वहाँ न तो सर्दी लगती है, न गर्मी। उस भवन में पहुँचकर लोगों को भूख, प्यास या पश्चाताप नहीं होता॥13॥ | mahabharat अध्याय 2.11: ब्रह्माजीकी सभाका वर्णन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुसुखा सा सदा राजन् न शीता न च घर्मदा।
न क्षुत्पिपासे न ग्लानिं प्राप्य तां प्राप्नुवन्त्युत॥ १३॥
अनुवाद
राजन! वह सदैव परम सुख देने वाला है। वहाँ न तो सर्दी लगती है, न गर्मी। उस भवन में पहुँचकर लोगों को भूख, प्यास या पश्चाताप नहीं होता॥13॥
King! It is always a source of supreme happiness. There one neither feels cold nor heat. On reaching that hall people do not feel hunger, thirst or remorse.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥