हे राजन! मैंने अपनी आँखों से आकाश में विचरण करने वाले कुबेर के सुन्दर दरबार को देखा है। अब मैं ब्रह्माजी के दरबार का वर्णन करूँगा; उसे सुनो॥40॥
O King! I have seen with my own eyes the beautiful court of Kubera which roams in the sky. Now I will describe the court of Brahmaji; listen to it. ॥ 40॥
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि लोकपालसभाख्यानपर्वणि धनदसभावर्णनं नाम दशमोऽध्याय:॥ १०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत लोकपालसभाख्यानपर्वमें कुबेरसभा-वर्णन नामक दसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)