श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 10: कुबेरकी सभाका वर्णन  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  2.10.34-35 
नन्दीश्वरश्च भगवान् महाकालस्तथैव च।
शङ्कुकर्णमुखा: सर्वे दिव्या: पारिषदास्तथा॥ ३४॥
काष्ठ: कुटीमुखो दन्ती विजयश्च तपोऽधिक:।
श्वेतश्च वृषभस्तत्र नर्दन्नास्ते महाबल:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
भगवान शिव के सभी दिव्य पार्षद जैसे भगवान नंदीश्वर, महाकाल और शंकुकर्ण वहां मौजूद हैं। 34-35॥
 
All the divine councilors of Lord Shiva like Lord Nandishwar, Mahakaal and Shankukarna are present there. 34-35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)