Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.10.31-33: हिमवान, पारियात्र, विंध्य, कैलाश, मंदराचल, मलय, दर्दुर, महेंद्र, गंधमादन और इंद्रकील तथा सुनाभ नामक दो दिव्य पर्वत - ये तथा मेरु आदि अनेक पर्वत धन के स्वामी महान भगवान कुबेर की पूजा करते हैं। 31-33॥ | mahabharat अध्याय 2.10: कुबेरकी सभाका वर्णन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हिमवान् पारियात्रश्च विन्ध्यकैलासमन्दरा:॥ ३१॥
मलयो दर्दुरश्चैव महेन्द्रो गन्धमादन:।
इन्द्रकील: सुनाभश्च तथा दिव्यौ च पर्वतौ॥ ३२॥
एते चान्ये च बहव: सर्वे मेरुपुरोगमा:।
उपासते महात्मानं धनानामीश्वरं प्रभुम्॥ ३३॥
अनुवाद
हिमवान, पारियात्र, विंध्य, कैलाश, मंदराचल, मलय, दर्दुर, महेंद्र, गंधमादन और इंद्रकील तथा सुनाभ नामक दो दिव्य पर्वत - ये तथा मेरु आदि अनेक पर्वत धन के स्वामी महान भगवान कुबेर की पूजा करते हैं। 31-33॥
Himavan, Pariyatra, Vindhya, Kailash, Mandarachal, Malay, Dardur, Mahendra, Gandhamadan and the two divine mountains named Indrakeel and Sunabha - these and many other mountains like Meru etc. worship the great Lord Kubera, the lord of wealth. 31-33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥