श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 10: कुबेरकी सभाका वर्णन  »  श्लोक 10-12
 
 
श्लोक  2.10.10-12 
मिश्रकेशी च रम्भा च चित्रसेना शुचिस्मिता।
चारुनेत्रा घृताची च मेनका पुञ्जिकस्थला॥ १०॥
विश्वाची सहजन्या च प्रम्लोचा उर्वशी इरा।
वर्गा च सौरभेयी च समीची बुद्‍बुदा लता॥ ११॥
एता: सहस्रशश्चान्या नृत्यगीतविशारदा:।
उपतिष्ठन्ति धनदं गन्धर्वाप्सरसां गणा:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मिश्रकेशी, रंभा, चित्रसेना, शुचिस्मिता, चारुनेत्र, घृताची, मेनका, पुंजिकस्थला, विश्वाची, सहजन्या, प्रम्लोचा, उर्वशी, इरा, वर्गा, सौरभेयी, समिचि, बुदबुदा और लता आदि हजारों अप्सराएँ और नृत्य और गायन में कुशल गंधर्व कुबेर की सेवा में उपस्थित रहते हैं। 10-12॥
 
Mishrakeshi, Rambha, Chitrasena, Shuchismita, Charunetra, Ghritachi, Menaka, Punjiksthala, Vishwachi, Sahajanya, Pramlocha, Urvashi, Ira, Varga, Saurabheyi, Samichi, Budbuda and Lata etc., thousands of Apsaras and Gandharvas skilled in dance and song are present in the service of Kubera. 10-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)