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mahabharat 2.1.8: राक्षस! मैं भी नहीं चाहता कि तुम्हारा संकल्प व्यर्थ हो। अतः तुम भगवान श्रीकृष्ण के लिए कुछ कार्य करो, ऐसा करने से मेरे प्रति तुम्हारा कर्तव्य पूरा हो जाएगा॥8॥   |   mahabharat अध्याय 2.1: भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञाके अनुसार मयासुरद्वारा सभाभवन बनानेकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.1.8 
न चापि तव संकल्पं मोघमिच्छामि दानव।
कृष्णस्य क्रियतां किंचित् तथा प्रतिकृतं मयि॥ ८॥
 
 
अनुवाद
राक्षस! मैं भी नहीं चाहता कि तुम्हारा संकल्प व्यर्थ हो। अतः तुम भगवान श्रीकृष्ण के लिए कुछ कार्य करो, ऐसा करने से मेरे प्रति तुम्हारा कर्तव्य पूरा हो जाएगा॥8॥
 
Demon! I also do not want that your resolve goes in vain. Therefore, you should do some work for Lord Krishna, by doing this your duty towards me will be fulfilled. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)