श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 1: भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञाके अनुसार मयासुरद्वारा सभाभवन बनानेकी तैयारी  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.1.7 
अर्जुन उवाच
प्राणकृच्छ्राद् विमुक्तं त्वमात्मानं मन्यसे मया।
एवं गते न शक्ष्यामि किंचित् कारयितुं त्वया॥ ७॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने कहा - मयासुर! तू सोचता है कि मैंने तुझे प्राण संकट से मुक्त कर दिया है, इसलिए तू कुछ करना चाहता है। ऐसी स्थिति में मैं तुझसे कोई कार्य नहीं करवा पाऊँगा।
 
Arjun said - Mayasura! You think that you have been freed from the danger of your life by me and that is why you want to do something. In such a condition I will not be able to get any work done from you. 7.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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