Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.1.4: अर्जुन बोले - हे राक्षसराज! इस प्रकार कृतज्ञता प्रकट करके आपने मेरे सारे उपकार चुका दिए हैं। आपका कल्याण हो। अब आप जाइए। मुझ पर प्रेम बनाए रखिए। मैं भी सदैव आप पर स्नेह रखूँगा॥4॥ | mahabharat अध्याय 2.1: भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञाके अनुसार मयासुरद्वारा सभाभवन बनानेकी तैयारी । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अर्जुन उवाच
कृतमेव त्वया सर्वं स्वस्ति गच्छ महासुर।
प्रीतिमान् भव मे नित्यं प्रीतिमन्तो वयं च ते॥ ४॥
अनुवाद
अर्जुन बोले - हे राक्षसराज! इस प्रकार कृतज्ञता प्रकट करके आपने मेरे सारे उपकार चुका दिए हैं। आपका कल्याण हो। अब आप जाइए। मुझ पर प्रेम बनाए रखिए। मैं भी सदैव आप पर स्नेह रखूँगा॥4॥
Arjun said - O demon king! By expressing your gratitude in this way, you have repaid all my favors. May you be blessed. Now you go. Keep loving me. I will also always have affection for you.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥