श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 1: भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञाके अनुसार मयासुरद्वारा सभाभवन बनानेकी तैयारी  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.1.3 
मय उवाच
अस्मात् कृष्णात् सुसंरब्धात् पावकाच्च दिधक्षत:।
त्वया त्रातोऽस्मि कौन्तेय ब्रूहि किं करवाणि ते॥ ३॥
 
 
अनुवाद
मयासुर ने कहा - कुन्तीपुत्र! तुमने मुझे अत्यन्त क्रोधी भगवान् श्रीकृष्ण से तथा मुझे जलाने के इच्छुक अग्निदेव से भी बचाया है। अतः बताओ, मैं तुम्हारी क्या सेवा कर सकता हूँ?॥ 3॥
 
Mayasura said - Kunti's son! You have protected me from Lord Krishna who was very angry and also from Agnidev who wanted to burn me. So tell me, what service can I do for you (in return of this favour)?॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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