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mahabharat 2.1.17: हे जनमेजय! उस समय दैत्यराज मय ने पाण्डवों को राक्षसों की अद्भुत कथाएँ सुनाईं।   |   mahabharat अध्याय 2.1: भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञाके अनुसार मयासुरद्वारा सभाभवन बनानेकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.1.17 
स पूर्वदेवचरितं तदा तत्र विशाम्पते।
कथयामास दैतेय: पाण्डुपुत्रेषु भारत॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे जनमेजय! उस समय दैत्यराज मय ने पाण्डवों को राक्षसों की अद्भुत कथाएँ सुनाईं।
 
O Janamejaya! At that time the demon king Maya narrated the wonderful tales of the demons to the Pandavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)