श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 1: भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञाके अनुसार मयासुरद्वारा सभाभवन बनानेकी तैयारी  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.1.14 
वैशम्पायन उवाच
प्रतिगृह्य तु तद्वाक्यं सम्प्रहृष्टो मयस्तदा।
विमानप्रतिमां चक्रे पाण्डवस्य शुभां सभाम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! भगवान श्रीकृष्ण की उस आज्ञा को मानकर मयासुर अत्यंत प्रसन्न हुआ और उसने उस समय पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर के लिए विमान के समान सुन्दर सभाभवन बनाने का निश्चय किया॥14॥
 
Vaishampayanji says- Rajan! Mayasura became very happy after obeying that order of Lord Krishna and at that time he decided to build a beautiful assembly hall like a plane for Pandu's son Yudhishthir. 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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