श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 1: भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञाके अनुसार मयासुरद्वारा सभाभवन बनानेकी तैयारी  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.1.13 
यत्र दिव्यानभिप्रायान् पश्येम हि कृतांस्त्वया।
आसुरान् मानुषांश्चैव सभां तां कुरु वै मय॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'मयासुर! एक ऐसी सभामंडप का निर्माण करो, जिसमें हम तुम्हारे द्वारा गढ़ी गई देवताओं, दानवों और मनुष्यों की शिल्पकला देख सकें।'॥13॥
 
'Mayasura! Construct such an assembly hall in which we can see the craftsmanship of the gods, demons and humans carved by you.'॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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